Tuesday, 9 August 2011

Biography Of Savitribai Phule .......





सावित्री बाई फूले

आधुनिक भारती सामाजिक क्रांति में महात्मा जयोतिराव फूले का उल्लेखनी योगदान रहा है, उसमें उनकी धर्मपत्नी सावित्री बाई का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सावित्री बाई का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नामगांव में हुआ। उनके पिता खंडाजी नेवसे पाटील थे। तत्कालीन परम्परा के अनुसार उनका विवाह 9 वर्ष की बाल्य अवस्था में ज्योतिराव फूले से हो गया था।


शिक्षण प्रशिक्षण 
 

विवाह के बाद उनके पति ने उन्हे शिक्षित किया। स्वयं फूले को उसके पिता ने एक मिशनरी स्कूल में भर्ती करवाकर उन्हे अंग्रेजी शिक्षा दिलवाई और फूले ने घर पर अपनी पत्नी करे पढाया-लिखाया। सावित्री बाई के साथ ज्योतिराव के पिता के दूर रिश्ते की एक बहन सगुणाबाई क्षीरसागर भी पढने-लिखने लगी। दोनो ने मराठी भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया। उन्होने अंग्रेजी मिशनरी महिला स्कूल में षिक्षा प्राप्त कर अध्यापन प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।



भारत की प्रथम  शिक्षिका


 1 जनवरी, 1848 को पुणे में जब फूले ने एक बालिका विद्यालय की स्थापना की, त बवह इस विद्यालय की नही वरन् भारत की प्रथम षिक्षिका बनी। बाद में वह प्रधानाध्यापिका भी बन गई। पुणे की इस स्कुल के संचालन के लिए फूले दम्पति को अथक प्रयास करने पड़े। इस स्कूल में अधिकांष छात्राएं ब्राह्मण जाति की थी लेकिन ब्राह्ममणों ने ही इस महिला स्कूल को चलाने का घोर विरोध किया और इसे धर्मविरोधी बताया। लेकिन सावित्री बाई अपने षिक्षण कार्य में निरन्तर लगी रही।


अछूतों के लिए विद्यालय


 सन् 1848 में ही पुणे नगर में फूले ने अछूत बस्ती में लड़के-लड़कियों के लिए एक स्कूल खोली। यह स्कूल अछूतों का प्रथम विद्यालय था। कुछ ही समय में फूले दम्पति ने पूणे तथा आसपास के गाँवों में 18 स्कूल खोले। इस षुभ कार्य में एक मुस्लिम महिला फातिमा षेख ने भी उनको काफी सहयोग दिया। फातिमा षेख भारत में पहली मुस्लिम अध्यापिका थी।


लेखिका एवं कवयित्री


 सावित्री बाई एक प्रतिभाषाली लेखिका व कवयित्री भी थी। उनका एक कविता संग्रह ‘काव्य फूले’ सन् 1854 में प्रकाषित हुआ था। उन्होने एक कविता ‘षुद्रों का दुःख’ लिखी थी। एक अन्य कविता ‘अज्ञान’ में उन्होने मानव का सबसे बड़ा षत्रु अज्ञान को ही बतलाया है।

बालहत्या प्रतिबन्धक गृह का संचालन

 सन् 1863 में जब फूले ने ‘बालहत्या प्रतिबन्धक गृह’ की स्थापना की तब सावित्री बाई ने ही उसका संचालन किया। उस गृह में लगभग 100 विधवाओं ने अवैध बच्चों का जन्म दिया। उनकी देखभाल सावित्री बाई ने ही की थी। इन्ही बच्चों में से एक ब्राह्मण विधवा के बच्चे को फूले दम्पति ने गोद लिया और उसका नाम यषवंत रखकर उसे अपना उतराधिकारी बनाया।


सत्यषोधक समाज के द्वारा निराश्रित बालकों की सेवा


 सन् 1876-77 में जब महाराष्ट्र में भयंकर अकाल पड़ा तो फूले की ओर से स्थापित ‘सत्यषोधक समाज’ द्वारा 200 निराश्रित बच्चों का भरण-पोषण किया गया। इसमें सावित्री बाई ने अपने पति के साथ रहकर बड़ी सेवा की । तब सावित्री बाई ने पुणे जिले के जुन्नर ग्रामीण क्षेत्र से अपने पति को लिखा था, ‘आप जो कल्याणकारी कार्य कर रहे है, उसमें मैं सदा आपकी सहायता कर सकूं, यही मेरी इच्छा है।’ इस प्रकार सावित्री बाई ने अपने पति के साथ रहकर अनेक प्रकार के कष्ट सहन किये।
 सन् 1890 में ज्योतिराव के स्वर्गवास के बाद उनके द्वारा स्थापित ‘सत्यषोधक समाज’ का उन्होने बड़ी कुषलता से संचालन किया। उन्होने बड़ी कुषलता से संचालन किया। उन्होने ‘सत्यषोधक समाज’ की सभा एवं सम्मेलनों में भाग लिया और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्षन भी किया। सन् 1897 में महाराष्ट्र में हैजा फैला, तब हजारों लोग बीमार होकर मरने लगे।

निर्वाण

 सावित्री बाई ने ‘सत्यषोधक समाज’ के कार्यकर्ताओं के साथ बीमारों की काफी सहायता की। 10 मार्च, 1897 को हैजे से बीमार एक महार एक महार अछूत लड़के की सेवा करते-करते वह स्वयं बीमार होकर स्वर्ग सिधार गई। सावित्री बाई की समाज के प्रति की गई सेवा अनुकरणीय और प्रेरणादायी है।




सावित्री बाई की स्मृति में भारत सरकार द्वारा दिनांक 10 मार्च,1998 को 2.00 रूपये का डाक टिकिट जारी किया गया। इस आयाताकार टिकिट में सावित्री बाई का चित्र प्रकाषित किया गया था। उत्तर प्रदेष सरकार द्वारा राज्य की सर्वश्रेष्ठ षिक्षिका को प्रति वर्ष ‘सावित्री बाई फूले पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाता है।

1 comment:

  1. shivam computer society dwara yah ek bahut hi achha aur mulnivasi bahujan samaj ke liye prayaash kiya gaya h. ese padhane s mulnivasi bahujan samaj ki soch avashya badlegi aur apne mahapuroosho ko janne me sahayata milegi. mein shivam computer society ki bhuri bhuri prashansa kartu hu.
    jai phoole jai bhim jai mulnivasi
    BABU RAM PANWAR, DISTT. PRESIDENT BAMCEF HARIDWAR

    ReplyDelete